बहन की कलाई पर राखी, धरती की कलाई पर हरियाली—रक्षाबंधन पर साहू परिवार का अनोखा संकल्प”
“बहन की कलाई पर राखी, धरती की कलाई पर हरियाली—रक्षाबंधन पर साहू परिवार का अनोखा संकल्प”
बालोद। रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई की कलाई पर बंधने वाली राखी का नाम नहीं, बल्कि उस पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, जिसमें प्रेम, विश्वास, अपनापन और जीवनभर एक-दूसरे की रक्षा का वचन छिपा होता है।
इसी पवित्र भावना को प्रकृति से जोड़ते हुए दल्ली राजहरा निवासी पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं साहू परिवार ने इस रक्षाबंधन को एक ऐसी खूबसूरत पहल के साथ मनाया, जिसने रिश्तों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।
इस अवसर पर प्रदीप साहू, सतीश साहू, उमाशंकर साहू, आशीष साहू, बहन पूजा साहू, गोरीमा साहू सहित परिवार के सदस्यों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, उसी तरह हर व्यक्ति को धरती और प्रकृति की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए। परिवार ने रक्षाबंधन की परंपरा को एक नई सोच देते हुए बहनों को फलदार एवं छायादार पौधे उपहार में भेंट किए।
इन पौधों को महज उपहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने वाले रिश्ते का जीवंत प्रतीक माना गया।
बहनों ने भी इस अनमोल उपहार को खुशी के साथ स्वीकार करते हुए संकल्प लिया कि वे इन पौधों का रोपण करेंगी, उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह सहेजेंगी और तब तक उनकी देखभाल करेंगी, जब तक वे एक हरे-भरे वृक्ष का रूप लेकर आने वाली पीढ़ियों को छाया और जीवनदायी हवा न देने लगें।
पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा कि आज बढ़ता तापमान, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं। ऐसे समय में केवल चिंता करने से नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए धरातल पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना केवल मिट्टी में पौधा रोपना नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए जीवन रोपना है।
उन्होंने भावपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि “जैसे राखी का धागा भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है, वैसे ही एक पौधे की देखभाल इंसान और प्रकृति के रिश्ते को मजबूत करती है। जिस तरह बहन की रक्षा का वचन जीवनभर निभाया जाता है, उसी तरह हमें भी लगाए गए पौधे की रक्षा का संकल्प जीवनभर निभाना चाहिए। यही धरती मां के प्रति हमारी सच्ची जिम्मेदारी होगी।”
साहू परिवार की यह पहल रक्षाबंधन के पर्व को एक नई दिशा देती नजर आई। राखी के पवित्र धागे के साथ पौधों की हरियाली जोड़कर परिवार ने यह संदेश दिया कि सच्चा प्रेम सिर्फ रिश्तों तक सीमित नहीं होता, बल्कि उस प्रकृति तक भी पहुंचना चाहिए, जो बिना किसी भेदभाव के हर इंसान को जीवन, छाया और सांस देती है।
दल्ली राजहरा और डौंडी क्षेत्र में साहू परिवार की इस पहल की सराहना हो रही है। यह पहल समाज को एक खूबसूरत संदेश दे रही है कि यदि हम अपने हर त्योहार को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दें, तो उत्सव की खुशी के साथ-साथ धरती के भविष्य को भी संवारा जा सकता है।
इस रक्षाबंधन आइए, रिश्तों की डोर के साथ हरियाली की डोर भी मजबूत करें और एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक सहेजने का संकल्प लें। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे खूबसूरत उपहार होगा।



