डौंडी के समस्त 35 संकुल के 216 स्कूल में जलसंरक्षण को बढ़ावा देने शालाओं में सम्पन्न कराई गई गतिविधि

डौंडी/बालोद

आज दिनांक 11/04/2025 को वि ख डौंडी के समस्त 35 संकुल के 216 स्कूल में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आदरणीय जिला कलैक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी एवं जिला समन्वयक अवन कुमार जांगड़े के संयुक्त मार्गदर्शन में वाटर बेल हेतु गतिविधि शालाओं में सम्पन्न कराई गई इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यक्रम किए गए सर्वप्रथम जागरूकता हेतु नारा वचन तत्पश्चात विद्यार्थियों द्वारा पानी के सदुपयोग पर विचार रखे गए *1. *वॉटर बेल’ (Water Bell) की शुरुआत*
स्कूलों में, ‘वॉटर बेल’ का प्रयोग किया जाना है । दिन में दो या तीन बार एक विशेष घंटी बजाई जाती है, जिसका अर्थ है कि सभी छात्रों को अपनी बोतल से पानी पीना है।
फायदा: इससे छात्र हाइड्रेटेड रहते हैं और दिन के अंत में बोतलों में बचा हुआ पानी यूँ ही नहीं फेंका जाता।
*2. ‘बाकी पानी’ का सही इस्तेमाल (The Leftover Water Experiment)*
अक्सर छुट्टी के समय छात्र अपनी बोतलों का बचा हुआ पानी मैदान या सिंक में फेंक देते हैं। इसके लिए स्कूल के बाहर एक “जल पात्र” या बाल्टी रखी जा सकती है।
*प्रयोग:* छात्र अपनी बोतल का बचा हुआ पानी उस बाल्टी में डालेंगे।
*उपयोग*: माली उस एकत्रित पानी का उपयोग पौधों में डालने के लिए करेगा।
*3. जल प्रहरी (Water Monitors)*
छात्रों की एक टोली बनाई जाए जिसे *’जल प्रहरी’* कहा जाए।
कार्य: इनका काम लंच ब्रेक या छुट्टी के समय यह देखना होगा कि कहीं कोई नल खुला तो नहीं है या कहीं पाइप से रिसाव (Leakage) तो नहीं हो रहा।
निष्कर्ष
पानी बचाने के ये प्रयोग न केवल स्कूल के पानी के बिल और खपत को कम करेंगे, बल्कि छात्रों में *”संसाधन संरक्षण”* की भावना भी पैदा करेंगे। जब बच्चे स्कूल में पानी बचाना सीखेंगे, तो वे इसी सीख को अपने घर और समाज तक भी ले जाएंगे।
*छोटा सा मंत्र:* “जल है तो कल है, और इसकी बचत ही इसका हल है।”
विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्री प्रवीण कुमार चतुर्वेदी एवं बीआरसीसी सच्चिदानंद शर्मा तथा समस्त संकुल समन्वयक शाला प्रबंधनसमिति के सदस्य गण गणमान्य नागरिकों ने भी सहभागिता की ।



