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छत्तीसगढ़

जल संचय, जन भागीदारी अभियान में बालोद जिले को मिली एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जिला प्रशासन और आम जनता के भागीदारी से बनाए गए 02 लाख 84 हजार से अधिक जल संरचनाओं में बारिश की पानी रोकने की क्षमता में हुई बेहतरीन वृद्धि

जल संचय, जन भागीदारी अभियान में बालोद जिले को मिली एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

जिला प्रशासन और आम जनता के भागीदारी से बनाए गए 02 लाख 84 हजार से अधिक जल संरचनाओं में बारिश की पानी रोकने की क्षमता में हुई बेहतरीन वृद्धि

जनभागीदारी माॅडल ने दी कैच द रेन अभियान को नई रफ्तार

बालोद, 11 जुलाई 2026

कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में बालोद जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के फलस्वरूप जिले को मिल रहे उपलब्धियों की फेहरिस्त में निरंतर नई कड़ियां जुड़ रही है। इसके अंतर्गत जनभागीदारी के माध्यम से वर्षा जल के संचयन, भूजल पुनर्भरण और तालाबों के पुनरूद्धार के माध्यम से जल संरक्षण के उपाय सुनिश्चित करने हेतु बालोद जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के तहत बालोद जिले को एक और महत्वपूर्ण उलपब्धि हासिल हुई है। उल्लेखनीय है जल संचय, जनभागीदारी अभियान के तहत बालोद जिला प्रशासन और आम जनता की भागीदारी से जून 2025 से मई 2026 के मध्य जिले में बनाए गए 02 लाख 84 हजार 917 जल संरक्षण और रिचार्ज ढांचे के माध्यम से बारिश के पानी को रोकने की क्षमता में बेहतरीन वृद्धि हुई है। ज्ञातव्य हो कि जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत बालोद जिले में ग्राम पंचायतों, स्थानीय एवं जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी से वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण के उपाय सुनिश्चित करने हेतु अनेक कार्य किए गए हैं। जिसका परिणाम मौजूदा मानसून सीजन में दिखने लगा है।

 

जिला प्रशासन द्वारा जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के तहत किए गए बेहतरीन कार्यों का असर जिले के गांवों में साफ दिखलाई दे रही है। इसके अंतर्गत बालोद जिले में किए गए नये प्रयोगों ने सूखी जमीन को पानी के बड़े स्त्रोत में बदल दिया है। इस अभियान के तहत गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुंडेरा के बोरवेल के पास बने रिचार्ज पिट भूजल स्तर को बढ़ाने में अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इस कार्य के अंतर्गत ग्राम पंचायत मंुडेरा में बंद पड़े बोरवेलों में रिचार्ज शाफ्ट लगाकर उन्हें फिर से चालू किया गया है। इसी तरह गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम पंचायत कोंगनी में बने रिचार्ज पिट के माध्यम से बहते हुए पानी को रोककर जमीन के अंदर पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम ओडारसकरी और खुटेरी ग्राम पंचायत में बने चेक डैम मानसून के पानी को भारी मात्रा में रोकने में अत्यंत मददगार साबित हो रहा है, साथ इसके माध्यम से ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। इसके अलावा भाठागांव आर में कंटूर ट्रेंच (खाइयों) से पानी का बहना कम हुआ है और मिट्टी में नमी भी बनी हुई है। इसके साथ ही वृक्षारोपण में भी अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे जिले में बने सामुदायिक चेक डेमों से खेती और आस-पास के गाँवों को सीधा फायदा मिल रहा है। मानसून से पहले जो ढांचे सूखे पड़े थे, वे अब पानी से लबालब हैं।

 

तवेरा नाले के पुनरुद्धार हेतु मिसाल बना जन भागीदारी अभियान

इस अभियान के अंतर्गत बालोद जिले की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गुंडरदेही विकासखण्ड के भाठागांव (आर) में स्थित तवेरा नाला का पुनरुद्धार कार्य है। कैच द रेन और जल संचय जन भागीदारी के तहत 14.3 किमी लंबे इस नाले को फिर से जीवित किया गया है। इसके लिए चेक डेम, खाइयां, मैजिक पिट, सोखता गड्ढे, इंजेक्शन वेल और वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसे 6,250 से अधिक ढांचे बनाए गए हैं। इस महत्वपूर्ण प्रयास से 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचय होगा और भूजल स्तर में 05 से 10 फीट तक सुधार होने की उम्मीद है। इससे अंचल की सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है और पर्यावरण को भी फायदा पहुँचा है।

उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण के कार्य में बालोद जिला सदैव अग्रणी रहा है। जल संचय, जनभागीदारी 1.0 अभियान में बालोद जिले में 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण ढांचे बनाए थे। इस बेहतरीन काम के लिए बालोद जिले को कैच द रेन अभियान के तहत देश में तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में पहला स्थान मिला था। इस महत्वपूर्ण उलपब्धि के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा बालोद जिले को सम्मानित भी किया गया था। बालोद की यह सफलता ’जन भागीदारी से जल संरक्षण’ की सोच को सच साबित करती है और यह दिखाता है कि कैसे समाज के सामूहिक प्रयास से पानी की समस्या को दूर किया जा सकता है। इस तरह से बालोद जिले में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’पानी के हर बूंद को बचाने’ के संदेश को आत्मसात कर जल संरक्षण के पुनीत कार्य को एक बड़े जन आंदोलन में बदलने का कार्य किया है।

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